खाटू के कण कण में विराजे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू के कण कण में विराजे श्याम धनि का ताल,

यही है कलयुग के अवतार,

तींनो बानो की शोभा न्यारी,

प्यारी नीले की असवारी,

मोरछड़ी का झाडाखाके होजा भव से पार,

यही है कलयुग के अवतार,

श्याम कुंड जैसे माँ गंगा,

डुबकी लगा कर हो जा चंगा,

पिछले सारे पाप धुले गे देगा जन्म सुधार,

यही है कलयुग के अवतार,

निजवान जैसी श्याम बगीची,

आलू सिंह जी ने हाथो से सींचि,

इस मिटी का तिलक लगा लो,.

हो गई कभी न हार,

यही है कलयुग के अवतार,

श्याम कहे इक ध्वजा चडालो,

मन चाहा सब प्रभु से पा लो.

गूंज रही सारी दुनिया में इनकी जय जय कार,

यही है कलयुग के अवतार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।