लायी वि ना गयी ते निभाई वि ना गयी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लायी वि ना गयी,ते निभाई वि ना गयी ॥

तेरी मेरी ओं टूट गयी माइये,

जिनवे टूट्या अम्बर तो तारा

सोच्या ना सी, मेरी भक्ति भूल जाएँगी

मेरे लायी अपनी शक्ति भूल जाएँगी ॥

मेनू तू मिलके, बिछड़ गयी दुबारा

तेरी मेरी ओं टूट गयी माइये,

जिनवे टूट्या अम्बर तो तारा

लायी वि ना गयी,

ते निभाई वि ना गयी ॥

तेरी मेरी ओं टूट गयी माइये,

जिनवे टूट्या अम्बर तो तारा

साणु अपना बना के छोड़ जान वालिये,

साणु ला ले चरणआ नाल दुबारा

मैंने मारदा ए जहां सारा

लायी वि ना गयी,

ते निभाई वि ना गयी ॥

तेरी मेरी ओं टूट गयी माइये,

जिनवे टूट्या अम्बर तो तारा

भेंटकरता:

राजीव राये झंडेवाला

८९२०९१२०५०

9013234165

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।