हरि आ जाओ

पारंपरिक
श्री राम भजन विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

मेरा कोई न, सहारा बिन तेरे, प्रभु राम, रमईया मेरे ll

भव सागर में, जीवन नईया, कोई नहीं है, तुझसा सहईया ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

यह जीवन है, तुझसे पाया, सब तेरे कोई ना पराया ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

इस जीवन के, बंधन खोलो, हे प्रभु अपनी, शरण में ले लो ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार ll

हरी आ जाओ, इक्क वार, हरी आ जाओ, इक्क वार,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।