ना तुम होते ना मैं होता

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी ना होते तो कुछ भी ना होता,

ना तुम होते ना मैं होता,

न फूलो में खुशबू होती,

ना दरिया में पानी होता,

ना जीवन में खुशिया आती,

ना सुख ये जहां होता,

ना तुम होते ना मैं होता,

दुःख का समन्दर बेहता यहाँ पे ना तुम होते ने मैं होता,

लेहरो में ना रंगत होती,

बस मुरझाया सा जहाँ होता,

ना तुम होते ना मैं होता,

जो प्यार मिला वो न मिलता,

परिवार मिला वो मिलता बस अन्धकार होता जग में,

तेरी रेहमत का न निशान होता,

ना तुम होते ना मैं होता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।