तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं

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॥ पावन पाठ ॥

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

मरते ते दम तक ना छोडू गा बाबा तेरी बंदगी,

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

दिल के कलम से लिखता रहू गा,

बाबा के तेरी श्यारी,

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

तुझपे निशावर कर दूंगा सब,

दुनिया की सारी खुशिया,

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

शिर्डी में जा कर मैं खो जाऊ,

ना होने दी वापसी ,

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

हमसर हर गिज ना छोड़े गा,

बाबा तेरी हज़ीरी,

तू है तू है तू है मेरी ज़िन्दगी साईं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।