किसे दी गरीबी

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॥ पावन पाठ ॥

किसे दी गरीबी दा मजाक नही उड़ाई दा,

तू की जाने भेद मेरे साईं दी खुदाई दा,

किसी दी गरीबी ......

मथे दियां लीका नाल मथा नही लाईदा,

किसे दी गरीबी ........

कल दा की पता हुन कहर की गुजारना,

कदे पेंदा जितना ते कदे पेंदा हारना,

लेखा दे सताया नु नि होर सताई दा,

किसे दी गरीबी ........

पता नहियो कह्देया रंगा विच राजी है.

पल विच जीती बन्दा हार जांदा बाजी है,

रब दी रजा दे विच राजी रहना चाहिदा,

किसे दी गरीबी ........

करदा है मान इथे कोठियां ते चारा दा,

निकल दिवाला जन्दा वड़े शाहुकारा दा,

पैसे पीछे लगया ते यार नि गवाई दा,

किसे दी गरीबी ........

सधरा ते चाहवा वाला गला घुट जनदे ने,

अपना बना के इथे यार लुट जांदे ने

एवे हर साथी नु नि सजन बनाई दा,

किसे दी गरीबी ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।