हरे राम रे हरे राम रे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हरे राम रे हरे राम रे,

ये कैसा प्यारा नाम है,

हरे राम रे हरे राम रे,

कोश्याला माँ का तारा है,

रघुकुल का ये उजियारा है,

कण कण में ये हर शन में,

ये व्यापक सुभो शाम है,

हरे राम रे हरे राम रे.....

दरशरथ नंदनंदन हितकारी की,

जय बोलो अवध बिहारी की,

ये केवट की नौका तारे,

अध्भुत इसका हर काम है,

हरे राम रे हरे राम रे,

इस नाम से पत्थर तर जाए,

सब बिगड़े काज सवर जाये,

ये शबरी के बेरो को चखे,

कुटियाँ में किया विश्राम है,

हरे राम रे हरे राम रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।