कशी नाथ हे विश्वेश्वर करूँ मैं दर्शन आकार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कशी नाथ हे विश्वेश्वर करूँ मैं दर्शन आकार

मन के सिंघासन पर आ बैठो, मैं हूँ तुम्हारा चाकर

टिका राखी त्रिशूल पर कशी, यह तीरथ धाम तुम्हारा

नंगे पाँव गंगा जल के कर आता कावड़िया प्यारा

मुक्ति धाम कहते काशी को, आया तुम्हारे दर पर

मन के सिंघासन पर आ बैठो, मैं हूँ तुम्हारा चाकर

जो भी तुमने दिया मुझे है, मैं वोही सौंपने आया

वारुणी ऐसी के संगम पर, मैं तुझे ढूंढने आया

देदो दर्शन विश्वेश्वर मेरे सारे पाप भुला कर

मन के सिंघासन पर आ बैठो, मैं हूँ तुम्हारा चाकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।