खुश नसीब है के पाया आप को

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॥ पावन पाठ ॥

किरपा करते झोलियाँ भर ते हो खुश नसीब है के पाया आप को,

खुशियां देते हो के गम हर लेते हो के खुश नसीब है के पाया आप को,

मैंने देखा है तुझमे रब को तुझमे ही परमात्मा,

परम पिता हो गुरु जी मेरे करदो दुखो का खात्मा,

ये खुशिया देते हो के गम हर लेते हो,

खुश नसीब है के पाया आप को....

सवासो की इस माला पर मैं लिख दू गुरु जी नाम को,

पल पल सिमरु हिरदये में परम पिता के नाम को,

ये खुशिया देते हो ये दुःख हर लेते हो,

खुश नसीब है के पाया आप को.....

ऐसी लग्न लागि है तुम संग गुरु जी मेरे आन मिलो,

प्रीत की रीत निभा दो गुरु जी हर पल मेरे साथ मिलो,

ये खुशिया देते हो गम हर लेते हो,

खुश नसीब है के पाया आप को...

मैंने देखा है तुझमे रब को तुजमे ही परमात्मा,

परम पिता हो गुरु की मेरे करो दुखो का खात्मा,

ये खुशिया देते हो गम हर लेते हो,

खुश नसीब है के पाया आप को

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।