मिल गए मुझको तुम साँवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब नहीं और कुछ चाहिए,

मिल गए मुझको तुम साँवरे,

बनके बंजारा भटका बहुत नाम का तेरे मैं वनवारे,

तू मिला दिल खिला प्यार का सिलसिला चल रहा बिन रुके पाँव रे,

अब नहीं और कुछ चाहिए,

मिल गए मुझको तुम साँवरे,

क्या क्या बताऊ मैं क्या क्या सुनाऊ,

मुझे तूने क्या क्या दिया है,

आँखों ने देखे जो सपने सारे उसको तूने पूरा किया है,

अब ना कोई कमी ज़िंदगी में रही मिलती किरपा की जो छाँव रे,

अब नहीं और कुछ चाहिए,

मिल गए मुझको तुम साँवरे,

दिल की तमना मचल ती थी दिल में,

था मजबूर ये दिल हमारा,

सताती नहीं कोई चिंता मुझे अब मिला जब से तेरा सहारा,

है दयालु बड़ा देके मरहम भरे घाव रे,

अब नहीं और कुछ चाहिए,

मिल गए मुझको तुम साँवरे,

आया शरण चूमे तेरे चरण कुंदन ऐसी हुई मेहरबानी,

तकदीर जागी लग्न तुमसे लागि बदल सी गई ज़िंदगानी,

छोड़ कर अब कही मुझको जाना नहीं सँवारे ये तेरा घाव रे,

अब नहीं और कुछ चाहिए,

मिल गए मुझको तुम साँवरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।