डूब चला दिन शाम ढले माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

डूब चला दिन शाम ढले माँ,

मंदिर में तेरे दीप जले,

काहे का दीपक मैया काहे की बाती,

सोने का दिया ला कपास की बाती,

जगमग तेरी माँ ज्योत जले,

भवानी तेरे मंदिर में ज्योति जले,

डूब चला दिन शाम ढले माँ,

मंदिर में तेरे दीप जले,

कहे की पलकिया काहे की डोर माँ,

चन्दन की पलकिया रेशम की डोर माँ,

झूला अमवा तले माँ तले,

भवानी तेरे मंदिर में ज्योति जले,

डूब चला दिन शाम ढले माँ,

मंदिर में तेरे दीप जले,

कौन ध्वजा लाये कौन चवर धुलाये,

हनुमत ध्वजा ले फेरे चवर धुलाये,

भरमा विष्णु आरती करे,

भवानी तेरे मंदिर में ज्योति जले,

डूब चला दिन शाम ढले माँ,

मंदिर में तेरे दीप जले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।