अति कभी ना करना प्यारे

हर्ष
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॥ पावन पाठ ॥

अति कभी ना करना प्यार है इति तेरी हो जाएगी ।

बिन पंखों के पंछी जैसे गति तेरी हो जाए ॥

अतिसुंदर की सीता मैया जिसके कारण हरण हुआ,

अति घमंडी था जो रावण जिसके कारण मरण हुआ ।

अति अभिमान कभी ना करना क्षति तेरी हो जाएगी ॥

बिन पंखों के...

अति वचन बोली पांचाली महाभारत का युद्ध हुआ,

अति दान देकर के राजा बलि भी बंधन युक्त हुआ ।

अति विश्वास कभी ना करना मती तेरी फिर जाएगी ॥

बिन पंखों के...

अति बलशाली सेना लेकर कौरव चकनाचूर हुए,

अति लालच वश जाने कितने सतकर्मो से दूर हुए ।

अति के पीछे हर्ष न दौड़ो अति अंत करवाएगी ॥

बिन पंखों के...

स्वर:गिरधर महाराज

रचना:हर्ष

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।