चारो पल्ला सुआ मोर बीच में कोयल करती शोर

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चारो पल्ला सुआ मोर बीच में कोयल करती शोर

सुन म्हारी …

दादी ऐ ऐ ऐ ..दादी ऐ ऐ ऐ ..

सुहाणी लागे थारी चुनड़ी…

जोधपुर से ल्याया चुनड़ी मारवाड़ को छापो

खण्डेला को साचो गोटो पुरो पाँच गज नाप्यो

आरी तारी को जाल बनायो देखो करके गोर..

दादी ऐ ऐ ऐ ..दादी ऐ ऐ ऐ ..

सुहाणी लागे थारी चुनड़ी…

जयपरिये से ल्याया घाघरो बावन कली को मोटो

लाम्पी बिचियो और बाकड़ो साचो लगायो गोटो

हीरा पन्ना चमके ज्यामे और रेशम की डोर

दादी ऐ ऐ ऐ ..दादी ऐ ऐ ऐ ..

सुहाणी लागे थारी चुनड़ी…

सीकर से चाँदी की पोली और बनायो झुमको

चूरू से तो नथ मंगाई और नागोर से कब्जो

रूप सुहानो निरख निरख कर नाचे जो मन मोर

दादी ऐ ऐ ऐ ..दादी ऐ ऐ ऐ ..

सुहाणी लागे थारी चुनड़ी…

कोटाबूँदी से पायल बनाई और मोत्या को चुड़ो

बीकानेरी जड़ाऊ बोरलो कनफूला को चुड़ो

उदियापुर की तागड़ी ज्यामे झालर लटके ज़ोर

दादी ऐ ऐ ऐ ..दादी ऐ ऐ ऐ ..

सुहाणी लागे थारी चुनड़ी…

Singer- ज्योति जाजोदिया

गुवाहाटी ,असम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।