तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे चरना च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

नजर मेहर दी डाल के तू एक वारि ता वेख भला,

मेरे जहे है लाख तनु तू मेरा सहारा इक भला,

तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

जग दी भूल भुलाया विच तू छोड़ी न मेरा साथ वे,

मैं पकड़ा ते तू छूट जाना तू कस के पकड़ी हाथ वे,

तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

ओगुण मेरे बथेरे ने मैनु तकदी विच तोलनि ना,

कमली है मैं दीवानी हां मैं मैनु भाव सागर विच रोली न,

तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

याद करा तेरा जीकर करा सिमरन तेरा दिन रात करा,

हर पल हर दम शुक्र हर वेले तेरी बात करा,

तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

हाथ जोड़ के चरना विच इहो मेरी अरदास वे,

चरना नाल मैनु जोड़ी रखी मेरी तोड़ी न आस वे,

तेरे चरण च जोड़ी प्रीत वे,

मैं ता जग दी भूलीया रीत वे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।