नचने दे मुझे नचने दे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के द्वारे मुझे नचने दे,

पाँव में पायल बालो में गजरा आँखों में मेरी कजरा है,

सजने दे यारा सजने दे,

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के द्वारे मुझे नचने दे,

आज सुहागन कहलाऊ गी,

साईं की मैं हो जाऊ गी,

होने दे मुझे होने दे,

साईं के रंग में मुझे खोने दे,

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के द्वारे मुझे नचने दे,

फूलो की बरसात भी होगी,

सारी दुनिया साथ भी होगी,

आने दे जरा आने दे भगतो की टोली जरा आने दे,

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के द्वारे मुझे नचने दे,

मिरधंग भाजे ढोलक भाजे,

साईं भजन में तबला भाजे,

भजने दे ढोला भजने दे बाबा की शादी है भजने दे.

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के द्वारे मुझे नचने दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।