एहो अरदास मेरी चरना च तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

सुख रखी दतिया तू सबना दे वेहड़े,

एहो अरदास मेरी चरना च तेरे,

किरपा बनाई रखी साई बाउ मेरे,

एहो अरदास मेरी चरना च तेरे,

रखना ख्याल दाता अपने रकीब,

होर कोई असारा न इस गरीब दा,

माफ़ कर दी गुनाह किते जेहड़े,

एहो अरदास मेरी चरना च तेरे,

सुख दुःख सांझे हों मापिया दे मान ते,

धिया पुत्त राजी रेहन सब दे जहां ते,

भुखियाँ दी भूख मिटे रोग न हों नेड़े,

एहो अरदास मेरी चरना च तेरे,

खुश हों एथे सब कोई आंख रोवे न,

मोहन कदी भी एथे दुखी कोई हॉवे न,

हंजुया दी माला रखा चरना च तेरे,

एहो अरदास मेरी चरना च तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।