दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव नाम दा झोला गल पा लिया,

दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया,

अब तो लागि लगन गुरु जी तेरी शरण,

गुरु जी तेरी शरण अब तो लागि लगन,

गुरु जी नाम रतन धन पा लिया,

सतगुरु प्यारे न दिल च वसा लिया,

दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया,

तेरी किरपा अपार मने सारा संसार,

तू ही सब दा पालनहार तू ही सब दा खड़ताल,

किने तर गये ते काइयाँ नु सम्बलाये,

दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया....

ऐसी अनजान सी बड़े नादान सी,

तेरी किरपा बिन बड़े वीरान सी,

भूले भटके सी सीधे राहे पा लिया,

दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया,

तेरा शुक्र करा लाख वार गुरु जी शुकराना करा बार बार गुरु जी,

तेरी भक्ति च जीवन रमा लिया किरपा करके तू मंदिर बना लिया,

दिल डुगरी वाले दे नाल ला लिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।