जैसा सोचोगे तुम

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जैसा सोचोगे तुम वैसा बन जाओ गे,

जैसा कर्म होगा वैसा फल पाओ गे,

श्रीस्टी करू का आधार है खुद का करलो दर्शन यही जीवन का सार है,

जैसा सोचोगे तुम वैसा बन जाओ गे,

मन में हो शुभ संकल्प तो जीवन में फिर दुःख कैसा,

जब अन्तर में शुभ भावना दिल में सुख सावन जैसा,

हार कर जो ना हारे जीत उसी की होती है,

गणगौर अँधेरे में जलती जगमग उसकी ज्योति है,

जैसा देखो गे तुम वैसा बन जाओ गे,

जैसा सोचोगे तुम वैसा बन जाओ गे,

ये सूरज है तो है किरण,

बादल है तो है पवन,

प्राण है तो है है तन मन साथ सुरो में है सरगम,

धरती है तो है सागर जल थल है तो है जीवन,

जीवन है तो है भगवन,

जैसा सोचोगे तुम वैसा बन जाओ गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।