मिल गए जो आप भगवन हमें

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॥ पावन पाठ ॥

मिल गए जो आप भगवन हमें,

खुशीयो से भरा जहां मिला,

है पाँव नहीं धरती पर उड़ने को खुला आसमान मिला,

मिल गए जो आप भगवन हमें,

रूहानी रंग में रंगे हुये हम पंख सुनहरे पाए है,

सारे जग के कष्ट मिटने को धरती पर फ़रिश्ते आये है,

तारो के भी पार अपने वतन में,

चलने का पथ आसान मिला,

है पाँव नहीं धरती पर उड़ने को खुला आसमान मिला,

मिल गए जो आप भगवन हमें,

तेरी मीठी मीठी तान सुनी तब ज्ञान की मीठी बातो में,

झर झर झरते सुख के झरने प्रभु याद की इन बरसातों में,

फल गये है पुण्य जन्मो जन्म के,

कल्याण का है वरदान मिला,

है पाँव नहीं धरती पर उड़ने को खुला आसमान मिला,

मिल गए जो आप भगवन हमें,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।