एक दिन ऐसा आयेगा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तोड़ चले गा जग से नाता सदा सदा के लिए सो जाएगा,

एक दिन ऐसा आयेगा,

धन दौलत और रिश्ते नाते सब पल में छूट जायगा,

एक दिन ऐसा आयेगा,

जिनको तू अपना कहता है ये न तेरे अपने है,

तू राही है जीवन पथ का ये सब सारे सपने है,

टूटे गा जब सपना तेरा सब अपना खो जायेगा,

एक दिन ऐसा आयेगा....

जबसे जग को अपना समजा जब से रब को भूल गया,

जन्मो से तू आता रहा हर वार गरब में झूल गया,

अब भी वक़्त है सुन ले बंदे बाद में तू पशतये गा,

एक दिन ऐसा आयेगा......

बचपन तेरा बीत गया और जाती तेरी जवानी है,

ये जीवन तो कल कल बेहता इतना नदियां का पानी है,

हाथ गुरु का थाम ले वार्ना बीच भवर में दुभ जायेगा,

एक दिन ऐसा आयेगा.....

नहीं जायेगा लख चौरासी जिसने गुरु को पाया है,

बड़भागी है गुरु संग जिसने जीवन सफल बनाया है,

गुरु चरणों से प्रीती करली अंत गुरु में समाये गा,

एक दिन ऐसा आयेगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।