तोला दुर्गा कहंव के मां काली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तोला दुर्गा कहंव के मां काली,

चारों धाम में तोरे है उजारी,

ओ माता रानी

का मैं चढ़ावंव तोला, दर्शन दे माता मोर..

चंद्रपुर में चंद्रसेनी कहाये तैं,

रायगढ़ मा बूढ़ी माई हो,

घूघरा नरवा मा बइठे हस काली बन के,

हरदी के गौंटिन दाई वो..

सारंगढ़ मा तैं समलाई,

ढोलेसरा के तैं बंजारी,

ओ मां भवानी,

का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

तोर लईका दाई, रोवत हौं तोर बर..

तोर बर मैं उदास हौं..

विनती ल सुन ले माता, सुन ले गुहार वो..

राख ले अंचरा के छांव वो..

तोर बिना ये मोर जिन्दगानी..

जइसे सावन होथे बिन पानी..

ओ माता रानी..

का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

देखत हौं चारो ओर, डहार नइ दिखै तोर..

कहां लुकागे महामाई तैं..

आंसू बरसगे दाई, चोला तरसगे वो..

कइसे पीर सुनाव मैं..

मोर नैना के प्यास बुझा दे..

तोर दर्शन बिना नइ बाचंव..

बचा ले दाई..

का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।