हे मेरे जोगिया

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॥ पावन पाठ ॥

जोगियां जोगियां रे हे मेरे जोगिया,

यु न बड़ा दूरिया,भक्ता के तू नजदीकियां रे,

हे विद्याता मेरे तुम हो दाता मेरे,

हु सहारे तेरे पिछला नाता मेरे,

माना मुझमे बड़ी खामिया,

जोगियां जोगियां .....

जन्मो का भिखरा ये जीवन सफर,

अब जर्रे को कैसे ये आये नजर,

हो कर्म तो मिले कोकियाँ,

जोगियां जोगियां......

बड़के सूरज से तेरी कही रोशनी,

यहाँ दर पाते है और अँधेरी गली,

कब सुनु गा तेरी बोलियां,

जोगियां जोगियां .........

मैं कहा तक खोजू जहां में तुझे,

तुम हो मुझमे मैं तुझमे बताओ मुझे,

तेरे मिलने की मंजूरियां,

जोगियां जोगियां ,.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।