अपने नाम की ज्योत जगा दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपने नाम की ज्योत जगा दे जो कभी मन से भुजने ना पाए,

जिस हाल से माँ मैं गुजरू,बस भरोसा माँ घटने न पाए,

अपने नाम की ज्योत जगा दे.....

वक़्त का ना कोई है ठिकाना ये बना दे या पल में मिटा दे,

लाख कोशिश करे कोई मइयां ये अकल और नीयत को डिगा दे,

ऐसी नौबत में तेरी छवि को दिल बिठा के माँ गिरने ना पाए,

अपने नाम की ज्योत जगा दे......

झरे झरे में तुम हो वसी माँ तेरी ताकत की तान नई है,

जबतक चाहे ना तू शारदे माँ तेरी मिलती बिरह नहीं है,

हो इबादत माँ जीवन में ऐसी,

जो चले दिल से रुकने ना पाए,

अपने नाम की ज्योत जगा दे

जो भी आया हमे मजहूल है,

क्यों की चाहत गुरु मगरूर है,

जिसपे छाया तेरी महीयर वाली,

ऐसा बिरला इनसे माँ दूर है,

तू है नुरो की नूर मेरे नूर पे,

काले बादल टिकने ना पाए,

अपने नाम की ज्योत जगा दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।