जरा तो इतना बता दो भगवन

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॥ पावन पाठ ॥

जरा तो इतना बता दो भगवन

लगी ये कैसी लगा रहे हो ।

मुझी में रहकर मुझी से अपनी

ये खोज कैसी करा रहे हो ।।

हृदय भी तुम हो तुम्ही हो स्पन्दन

प्रेम तुम हो तुम्ही हो प्रेमी ।

पुकारता मन तुम्हीं को क्यों फिर

तुम्हीं जो मन में समा रहे हो ।। जरा...

प्राण तुम हो तुम्ही हो प्रियतम

नयन भी तुम हो, तुम्ही हो मधुबन ।

तुम्हे पुकारूं तुम्हीं को ढूंढूं

अजब ये लीला करा रहे हो ।। जरा...

भाव भी तुम हो तुम्ही वंदना

संगीत तुम हो तुम्ही हो रचना ।

स्तुति तुम्हारी तुम्हे सुनाऊँ

यह कैसी पूजा करा रहे हो ।। जरा...

कर्म भी तुम हो तुम्ही हो कर्ता

धर्म भी तुम हो तुम्ही हो धर्ता ।

निमित्त कारण मुझे बनाकर

ये नाच कैसा नचा रहे हो ।। जरा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।