भगे शेर दी सवारी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भगे शेर दी सवारी तेरी शेर दी सवारी साहनु लगदी प्यारी,

साहनु लगदी है जान तो प्यारी मैया जी भगे शेर दी सवारी,

किनी सोहनी लगदी तेरी चुनरी गोटे वाली,

हाथ त्रिशूल विराजे तेरी अक्श प्यार दी लाली,

जय काली कलकत्ते वाली तेरा वार ना जावे खाली,

भगे शेर दी सवारी तेरी शेर दी सवारी साहनु लगदी प्यारी,

तीन देवते देवी देवता करदे तेरी पूजा,

इस जग विच माँ शेरावालिये तुझबीण अमर न दूजा,

दिल्ली दे विच रेहनी आ माँ मेरी झंडेवाली,

भगे शेर दी सवारी तेरी शेर दी सवारी साहनु लगदी प्यारी,

नैना देवी दे चिंतपूर्णी दे सारे दर्शन पाओ,

मणि दे रल के सारे माँ दियां भेटा गाओ,

इक न इक दिन वर देवेगी मेरी शेरावाली,

भगे शेर दी सवारी तेरी शेर दी सवारी साहनु लगदी प्यारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।