रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है,

जब कोई नहीं आता मेरे श्याम ही आते है,

रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है,

जिन नजरो को बाबा इक आंख न भाता था,

करते थे सभी पर्दा जब मैं दिख जाता था,

अब वो ही गले लग कर अपना पन दिखाते है,

जब कोई नहीं आता मेरे श्याम ही आते है,

रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है,

सब ने हस्ता देखा मेरे गाव नहीं देखे,

उचाई दिखी सब को मेरे पाँव नहीं देखे,

उस मंजिल को पाने में शाले पड़ जाते है,

जब कोई नहीं आता मेरे श्याम ही आते है,

रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है,

अपनों के सभी रिश्ते फीके पड़ जाते है,

जब साथ से पैसो के पते झड़ जाते है,

मतलब से सभी माधव यहाँ रिश्ता निभाते है,

जब कोई नहीं आता मेरे श्याम ही आते है,

रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हसाते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।