धन्य तुम्हरा गुरुदेव

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॥ पावन पाठ ॥

धन्य तुम्हरा गुरुदेव जी मुझपर जो उपकार किया,

मेरी ऊँगली पकड़ कर तूने मुझको भव से पार किया,

धन्य तुम्हरा गुरुदेव ........

काम क्रोध मद लोभ में फस कर मैंने जीवन नर्क किया,

अपनी शरण में लेकर तुमने मेरा जीवन फ़र्ज़ किया,

पत्थर था पारस की तरह तुमने मुझको सवार दिया,

धन्य तुम्हरा गुरुदेव ......

मेरा हर दुःख सुख में बदला केवल आप की रेहमत है,

मेरे इस सारे जीवन में केवल आप का ही हक़ है,

तुमने मेरे इस जीवन का हर सपना साकार किया,

धन्य तुम्हरा गुरुदेव ........

धर्म अधर्म की मंध को समजा सतये असताये को जाना है,

आप की किरपा से इस जग के सार को भी पहचाना है,

आप ने बच्चो के जीवन को जीने का अधार दिया,

धन्य तुम्हरा गुरुदेव .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।