तुमने चरणों से लगाया ओर क्या चाहिए

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॥ पावन पाठ ॥

तुमने चरणों से लगाया, ओर क्या चाहिए ॥

मेरा हर गम मिटाया, ओर क्या चाहिए ॥

ओर क्या चाहिए, बाबा क्या चाहिए ॥

आया था तेरे दर पे तेरे चरचे सुनकर ॥

हर दुख तुमने दूर किए काँटे चुनकर ॥

मुझपे करम कमाया ओर क्या चाहिए ॥

मेरा हर गम मिटाया ओर क्या चाहिए ॥

दीनो के दाता साँईं जी तुम ही तो हो ॥

जो तुम ना करोगे तो करम कोन करेगा ॥

तुमरे सिवा झोलि मेरी कोन भरेगा, बाबा कोन भरेगा

दीनो के दाता साँईं जी तुम ही तो हो ॥

जो मु माँगा वर देते तुम ही तो हो ॥

मेरा दामन भर वाया ओर क्या चाहिए ॥

मेरा हर गम मिटाया ओर क्या चाहिए ॥

तुझसा नही है कोई मेरा इस जहान मे ॥

किसको पुकारूं तेरे सिवा इस जहान मे ॥

हर रास्ता दिखाया ओर क्या चाहिए ॥

मेरा हर गम मिटाया ओर क्या चाहिए ॥

जब तक बिका ना था तो कोई पूछता था

तुमने खरीद कर मुझे अनमोल कर दिया ॥ ॥

रखली हैं लाज तुमने अपने अशोक की ॥

पल मे बनाई बिगड़ी अपने अशोक की ॥

जीवन सफल बनाया ओर क्या चाहिए ॥

मेरा हर गम मिटाया ओर क्या चाहिए ॥ ॥

साँईं भजन सिंगर एवं भजन लेखक

श्री अशोक साँई जी

पता = पानीपत तेहसिल कैम्प

मो : 090342-04944

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।