झंडे वाली दा दीदार सारे पालो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झंडे वाली दा दीदार सारे पालो

आके दर ते शीश झुकालो

झंडे वाली मैया सदा झोलिआं नु भरदी

भागता प्यारेयां ते मेहरा मैया करदी

दर ते पलड़ा आन विछा लो

झंडे वाली दा दीदार सारे पालो

सोहने सोहने झंडे माँ दे मंदिरां ते झुलदे

बंद जो नसीबा वाले ताले सारे खुल्दे

आके दिल दी गलल सुनालो

झंडे वाली दा दीदार सारे पालो

‘राजू हरिपुरिये’ नू देंदी ए दीदार माँ

जेहड़ा माँ नू मनदा ए, लौन्दी बेडा पार माँ

भेटां गा के माँ नू मन लो

झंडे वाली दा दीदार सारे पालो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।