एना आखियॉ नु लेन दे नजारा मैये नी थोडी देर ठहर जा

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एना आखियॉ नु लेन दे नजारा मैये नी थोडी देर ठहर जा,

वेला मुड नई

यो औना ए दोबारा मैये नी थोडी देर ठहर जा,

कईय़ा जनमा दे बाद मॉ नासीब खुल गए,

मैनु जनमा दे दातिये नी दुख बुल गए ,

मुड देवी ना मुड देवी ना बिछोडा मैनु दवारा मैये नी थोडी देर ठहर जा,

नैना मेरे यादे चाहा पूरे होन दे नी मॉ,

नाले हनजूआ दे पैर जरा धोन दे नी मॉ,

दस लेन दे दस लेन दे नी हाल मैनु सारा मैये नी थोडी देर ठहर जा,

एना बचिया नु छड मैये केदा जावेगी,

जिथे जाएगी मॉ ओथे साडी याद आएगी,

आ ना पावेगा आ ना पावेगा अथे ही दोबारा मैये नी थोडी देर ठहर जा,

सानु चरणा दी धुल मथे लोन दे नी मॉ,

सानु सुतेया नासीबा नु जगोन दे नी मॉ,

नाईयो ऱविन दा नाईयो ऱविन दा तेरे बिन गुजारा मैये नी थोडी देर ठहरजा,

पोस्टिंग बय : रविन बंसल ( जय माता दी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।