गुण गावा दिन रात गुण गवा

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॥ पावन पाठ ॥

गुण गावा दिन रात गुण गवा,

विसर नाही दातार अपना नाम देहो,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

सतनाम श्री वाहेगुरु सतनाम श्री वाहेगुरु,

सिमरत वेद पुराण पुकारन को थइयाँ,

नाम बिना सब कुड गली हो छियां,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

नाम निधान अपार भगता मन वसे,

जन्म मरण मोह दुःख साधु संग नसे,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

मोहे बाद ओंकार सिर पर रुनिया,

सुख न पाए मूल नाम विशुनिया,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

मेरी मेरी ता बंधन बंदेया,

नर्क सुरग अवतार नाया धंदेया,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

सोधक सोधक सोध तख विचारया,

नाम बिना सुख ना ही सिर पर हारिया,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

आवे यहे अनेक मर मर जन्म ते,

बिन भुजे सब वाद जूनि भरम ते,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

जिनको भये दयान तीन साधु संग पिया,

अमृत हल्का नाम तीनि जनि जप लिया,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

खोजे कोट असंख बहुत अंतंत के,

जिस भुजाये आप नेडा तिस हे,

गुण गावा दिन रात नानक जाओ इहो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।