पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा

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॥ पावन पाठ ॥

पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा,

हर वेले करण संभाल मैं क्यों गबरावा,

अंग संग रेह्न्दे सदा साथ गुरु आप ने,

टल जांदे भगता दे दुःख संताप ने,

मिट जांदे सब जन जाल मैं क्यों गबरावा,

पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा,

नेकियां दी रहा उते आसा चलाया है,

बलिया बुराइयां कोलो हमेशा बचाया है,

हर दम रखदे ने ख्याल, मैं क्यों गबरावा,

पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा,

सुख विच दुःख विच गम विच ख़ुशी विच,

छाड़ियाँ ना इकला कदे साहनु ज़िंदगी च,

रेहमत किती हर हाल मैं क्यों गबरावा,

पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा,

बन के खिवैयाँ सदा डूभी दी तराई है,

विच तूफानों बेड़ी साहिला ते लाइ है,

बदली समय दी चाल, मैं क्यों गबरावा,

पल पल ने गुरु जी नाल मैं क्यों गबरावा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।