मैं गुरु बिन देखे नींद न आवे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं गुरु बिन देखे नींद न आवे,

मेरे मन तन में गुरु बिरहु लगावे,

नींद ना आवे नींद ना आवे,

मद सूदन मेरे मन धन प्राणा,

ओ हरी बिन दूजा न जाना,

कोई सजन संत मिले बड़बागी,

मैं हर प्रभु पराया दसे जीवो,

नींद ना आवे ....

हो मन धन खोजी पाल पलाई,

क्यों प्यारा प्रीत मिले मेरी माई,

मिले सत्संगत खोज देसाई,

मिले सांगत हर प्रब वासे जियो,

नींद ना आवे ....

मेरा प्यारा प्रीतम सतगुरु रखवाला,

हम बालक दीं करो पर्थ पाला,

मेरा मात पिता गुरु सतगुरु पूरा,

गुरु जल मिल थम विगसे जियो,

नींद ना आवे ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।