गुरु जी दया करके मुझको अपना लेना

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी दया करके मुझको अपना लेना,

मैं शरण पड़ा तेरे चरणों में जगह देना,

करुणा निधि नाम तेरा करुणा दिखलाओ तुम,

सोये हुए भाग्ये को ये गुरु जी जगाओ तुम,

मेरी नाव भवर ढोले उसे पार लगा देना,

मैं शरण पड़ा तेरे चरणों में जगह देना,

तुम के सुख के सागर हो,

निर्धन के सहारे हो मेरे मन में समाये हो,

मेरे प्राणो से प्यारे हो,

नित माला जपु तेरी नहीं दिल से भुला देना,

मैं शरण पड़ा तेरे चरणों में जगह देना,

पापी हो या कपटी हो जैसा भी हु तेरा हु,

घर बार छोड़ के मैं जीवन से खेला हु,

दुःख का मारा हु मैं मेरे दुखड़े मिटा देना,

मैं शरण पड़ा तेरे चरणों में जगह देना,

मैं तेरा सेवक हु चरणों का चेला हु,

नहीं गुरु जी भुला मुझको इस जग में अकेला हु,

तेरे दर का भिखारी हु मेरे दोश मिटा देना,

मैं शरण पड़ा तेरे चरणों में जगह देना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।