चिंता छोड़ के गुरु जी नु धया ले

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॥ पावन पाठ ॥

चिंता छोड़ के गुरु जी न धया ले कारज सारे रास होंगे,

तन रोगी होता मन रोगी होता,

चिंता कर के कुझ नहियो होता,

मन दी वाधा गुरुआ न सौंप दे के कारज सारे रास होंगे,

चिंता छोड़ के गुरु जी न धया ले कारज सारे रास होंगे,

मन दिन वंगा गुरु हाथ सौंप दे के कारज सारे रास होंगे,

चिंता छोड़ के गुरु जी न धया ले कारज सारे रास होंगे,

जितना समा तू चिंता च लगाना है,

उतना समा तू अपना गवाना वे,

उस समय नु तू संब्ला बना दे गुरा दे गुण गा दे,एह कारज सारे रास होंगे,

चिंता छोड़ के गुरु जी न धया ले कारज सारे रास होंगे,

तन रोगी हुँदा मन रोगी हुँदा,

चिंता करके कुझ नहीं हुँदा,

मन दिया आवाज गुरा दे हाथ सौंप दे,एह कारज सारे रास होंगे,

चिंता छोड़ के गुरु जी न धया ले कारज सारे रास होंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।