चोखट पे आके जो भी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चौकठ पे आके जो भी सिर जो झुकाये रे,

ख़ाली झोली पल में देखो कैसे भर जाये रे,

चोखट पे आके जो भी....

दीदार आप का आज भी होता है,

पल में हसा देते हो जब भी कोई रोता है,

अर्जी लगाने वाला दिल से लगाये रे,

ख़ाली झोली पल में देखो कैसे भर जाये रे,

चोखट पे आके जो भी....

नजरे कर्म जिसपर आप का हो जाता है,

छोड़ के वो सारी दुनिया आप का हो जाता है,

चरणों में आके जरा ध्यान लगाये रे,

ख़ाली झोली पल में देखो कैसे भर जाये रे,

चोखट पे आके जो भी....

दर पे मैं तेरे सइयां आस लेके आया हु,

मुझ पे भी रेहमत करदो आप का ही जाया हु,

इक बार आता जो बार बार आये रे,

ख़ाली झोली पल में देखो कैसे भर जाये रे,

चोखट पे आके जो भी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।