मेला मैया दा आउँदा है हर साल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेला मईया दा ll, आऊँदा ऐ हर साल,

ओ लोकी नच्दे ने ll, दर ते खुशियाँ नाल,

ओ मेला मईया दा, ओ मेला मईया दा

जेहड़ा वी सवाली दूरो, चल दर आउँदा,

ओह्दी झोली विच्च, खैर मईया पावंदी,,,,2"

मन्दिराँ च आके जेहड़ा, जोत नु जगाउंदा,

"ओहनू सच्ची मईया, दरश दिखावंदी,,,,2"

वंडदी मुरादां सारे, भगतां नू अम्बे,

देवे खुशीआं च, करदी निहाल,

ओ मेला मईया दा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

लाल सूहा चोला अठ्ठा, बाहवां विच्च चूड़ा,

"सिर किन्ना सोहना, मुकुट माँ सजदा,,,,2"

किन्नी सोहनी लग्गे तेरी, शेर दी सवारी,

"साड्डा तक तक, दिल न्हीओं रज्जदा,,,,2"

उच्चा अते सुच्चा तेरा, दर अम्बे रानीए नी,

झंडे तेरे, झुलदे ने लाल,

ओ मेला मईया दा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सारे पासे लगदे ने, मईया दे जयकारे,

"नाले होन जगराते, शेराँ वाली दे,,,,2"

बोलदे ने भेटां वांगु, भगत ध्यानु,

"दर नच्च्दे ने सारे, मेहराँ वाली दे,,,,2"

बल्ले बल्ले हो गयी, सारे मेले विच्च देखो,

ऐसा अम्बिका ने, कीता ए कमाल,

ओ मेला मईया दा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सारे जग नालो सोहना, मईया दा दवारा,

"जिथ्थे आके सारे, सीस नू झुकावंदे,,,,2"

कटदी ए भगतां दे, दुःख माँ भवानी,

"ताहीओं आ के सारे, दुखड़े सुनावंदे,,,,2"

मंगदा ए खैरां, शेराँ वाली कोलो राजू,

नाले गाउँदा ए ‘सलीम’ विच्च ताल,

ओ मेला मईया दा,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।