गुरु जी शूकर करा

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा हर वेले दिन रात गुरु जी शूकर करा,

मेरी बनी रही जी बात गुरु जी शूकर करा,

मेरे बदल गये हालात गुरु जी शूकर करा,

मेरी बन गई बिगड़ी बात गुरु जी शूकर करा,

मेरी सुनली तू अरदास गुरु जी शूकर करा

सरताजों के सरताज गुरु जी शूकर करा,

कट गई अँधेरी रात गुरु जी शूकर करा,

हुई अमृत की बरसात गुरु जी शूकर करा

प्यारा दिया परिवार गुरु जी शूकर करा,

मेरा जीत लिया विश्वाश गुरु जी शूकर करा,

मेरे अंग संग बस हो आप गुरु जी शूकर करा,

जन्मो की भुज गई प्यास गुरु जी शूकर करा

तेरे नाम हुई हर सांस गुरु जी शूकर करा,

तूने हर पल दिया मेरा साथ गुरु जी शूकर करा,

खाली न गई दर खास्त गुरु जी शूकर करा,

सरकारों की सरकार गुरु जी शूकर करा,

सत्संग करवाया आज गुरु जी शूकर करा,

गुरु जी घर आये आज गुरु जी शूकर करा,

जागे सोये हुए भाग गुरु जी शूकर करा,

जो खाये तेरा परशाद गुरु जी शूकर करा,

तेरा प्यारा लगे दरबार गुरु जी शूकर करा,

तूने इतने किये उपकार गुरु जी शूकर करा,

तूने डूंगरी भुलाया आज गुरु जी शूकर करा,

तेरा दर आया मुझे रास गुरु जी शूकर करा

रोते हो हसाया आज गुरु जी शूकर करा,

दिया प्यारे से हाथ गुरु जी शूकर करा,

मिली सुखो की सौगात गुरु जी शूकर करा

मेरी सुनली तू अरदास गुरु जी शूकर करा

तूने बेडा लगाया पार गुरु जी शूकर करा,

सुख चैन की हुई बरमार गुरु जी शूकर करा

मुझे आप से कहना है आज गुरु जी शूकर करा,

आज बस में नहीं जज्बात गुरु जी शूकर करा,

मेरिया अखियां नाम है आज गुरु जी शूकर करा,

आई शगना वाली रात गुरु जी शूकर करा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।