आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे,

छा गई रे छा गई रे देखो खुशाली छा गई रे,

आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे,

विश्न भुजाये लम्बी जटाये,

आँखों में जवाला दिखा रही रे,

देखो माँ काली आ रही रे,

आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे,

हाथो में लेके मुंडो की माला भर भर के खपर रुदीर की डाला,

भला तिरशूल चला रही रे,

आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे,

काली काली अमावस में आये,

ललित सुमित तेरी महिमा गाये,

भक्तो के मन को भा रही रे,

देखो माँ काली आ रही रे,

आ गई रे देखो माँ काली आ गई रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।