तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

हाथ जोड़ के द्वार तेरे ते तेरे संत पुकार दे,

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

शिव शंकर डमरू खडकाये,

ब्रह्मा जी मस्ती विच गाये,

नारद नु विष्णु जी अखन देख रंग सरकार दे,

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

लाल भुजवा हाथ विच फड़िया टल टनिया ओहना दिया जड़ियाँ,

सुहे सुहे गल बाने पाके आये फक्र दरबार वे,

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

नन्द नंदा ने यगण रचाया माँ देवा नु आप भुलाया,

रात हुई पर माँ ना आई,

लोग ने ताने मारदे,

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

चं तेरे दर दे दीवाने लै लै के अपने नजराने,

अवन तेरे ते ाँ खड़े ने खुले खुले दीदार ने,

तार दे माँ तार दे भगता न माँ तार दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।