मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की

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॥ पावन पाठ ॥

मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की,

जाऊगी बैठ के डोली साजन की,

मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की,

मैं तेरी द्रोपती तू मेरा कन्हियाँ,

बहना को भूल न जाना ओ मेरे भइयां,

याद न भूलना रक्षा बंधन की,

मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की,

एह मेरी मैया क्यों रोती है,

बेटी पराया धन होती है,

राजा की हो या निर्धन की,

मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की,

चले है कहा मेरी डोली उठा के,

करदो विदा मुझे शगुन गीत गा के,

याद न भूलना मेरे बचपन की,

मैं गुड़ियाँ तेरे आंगन की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।