सँवारे अब तेरे बिन कैसे कटेंगे ये दिन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू से निकलते ही कुछ दूर चलते ही,

जाते कदम क्यों ठहर ग्यारस को आना है ये जानता हु मैं,

फिर आंखे क्यों आई भर,

सँवारे अब तेरे बिन कैसे कटेंगे ये दिन,

तेरी जुदाई का गम सेह न पाएंगे हम,

खाटू से निकलते ही कुछ दूर चलते ही,

जाना चाहु जा ना पाउ कैसा तेरा प्यार रे,

ऐसा लगे छूट रहा यहाँ सब सांवरे,

आँखों से आंसू अब रुक न पाए मेरे कदम अब आगे न जाए,

तेरी जुदाई अब सेह न पाउ,

तेरे बिना अब मैं रह ना पाउ,

खाटू से निकलते ही कुछ दूर चलते ही,

जब यामा ओ सांवरे तूने मेरा हाथ रे,

हर ख़ुशी अब मेरी तेरे साथ रे,

साथ तेरा ये छूट ना जाये,

दर है कही तू रूठ न जाये,

रूठ गये जो मुझसे सांवरियां,

तेरे बिना फिर हम जी न पाए,

खाटू से निकलते ही कुछ दूर चलते ही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।