खाटू से निकलते ही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू से निकलते ही कुछ दूर चलते ही पाँव तो जाते ठहर,

सांवरे की यादो को ले के चले है यो आंखे तो जाती है भर,

सांवरे से होक जुदा रहना हुआ है मुश्किल,

दर्शन को फिर आये गे इनको पुकारे ये दिल,

खाटू से निकलते ही.......

देखे उन्हें दिल तो करे झपके न पलके कभी,

ऐसा हसीं दूजा नहीं होते दीवाने सभी

वापिस है जाना दिल तो ना माने,

आँखों से बहते गम के तराने,

धुन ला सी जाती है डगर,

खाटू जो आते है घर भूल जाते है,

बाबा से मिलती जब नजर,

खाटू से निकलते ही.......

हाथो से है दिल तो गया ऐसी बंधी डोर है,

दीवानो पे बाबा का ही चलता सदा जोर है,

धड़कन में है वो तन मन में है वो सांसो में है वो जीवन में है वो,

दीखता है देखे हम जिधर,

बेबस तो है चोखानी टोनी ने हार मानी दीवानगी है किस कदर,

खाटू से निकलते ही.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।