दसरथ के राज कुमार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

दसरथ के राज कुमार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

थी साथ में जनक दुलारी पत्नी प्राणो से प्यारी,

सीता सतवंती लाल वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

भाई लखन लाल बलशाली उसने तीर कमान उठा ली,

भाई भाभी का पहरे दार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

सोने का हिरन दिखा ता उस में सीता हरण छिपा था,

लक्ष्मण रेखा हो गई पार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

हनुमान से मेल हुआ सा सुग्रीव भी गेल हुआ था,

वानर सेना की त्यार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

लक्षमण बेहोश हुए थे तो राम के होश उड़े थे,

रोये नारायण अवतार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

दुष्टा चरण हुआ था तो रावण मरण हुआ था,

उसका तोड़ दिया एहंकार वन में फिरते मारे मारे,

दुनिया के पालन हार वन में फिरते मारे मारे,

जब राम अयोध्यया आये घर घर में दीप जलाये,

मनी दीवाली पहली वार जब अवध में राम पदाहरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।