मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब तक चुनरी जाचे न जाचे न ये दरबार,

मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार,

जब तक चुनरी जाचे न जाचे न ये दरबार,

जद पूजा को थाल सजावा,

पहला थारी चुनरी रखावा,

जद जा कर थाल थारो माँ हॉवे त्यार,

मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार,

चुनरी का अला पला बाहरी,

सांचो घोटो साँच किनारी,

चारो मेर चुनरी माहि साँचा तेरा दरबार,

मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार,

चाहे माहरी आंख में जाचे न,

चाहे महारे दिमाग में जाचे माँ,

जब तक मन्दे में जचे न हे मत करियो इंकार,

मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार,

बनवारी जद थाने चुनरी उडावा.

चुनरी को पलो हाथ में थमामा,

एहने खोलनों है मियां याद तू आवा बारम बार,

मैया थारी चुनरी जचावा सो सो बार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।