साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग,

उड़ना मैं सीखी आ साई जी दे संग,

साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग,

दुःख विच हसना साई ने सिखाया है,

भुले वांगु नच के मैं यार मनाया है,

वेख के ज़माना हूँ रह जो दंग,

साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग,

नीवा होके चलना साई ने सिखाया है,

बिगड़ा नसीबा मेरे साई ने बनाया है,

तू भी फड़ पल्ला होजा साई जी दे संग,

साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग,

मनी ते नामित उते रेहमता दी शा है,

तू ही मेरा बाप साई तू ही मेरी माँ है,

दिल तो पुकारा साई रेह्न्दा मेरे संग,

साई दी पतंग मैं ता साई दी पतंग,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।