कभी फुरसत हो तो सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कभी फुरसत हो तो सांवरिया, भगतों के घर भी आ जाना,

जो रूखा सूखा घर पे बना, कभी उसका भोग लगा जाना,

ना छत्र बना सका सोने का, ना बागा हीरे मोती जड़ा,

ना मोरछड़ी इन हाथों में, तेरा भगत है नैन बिछाए खड़ा,

मेरी श्रद्धा की रख लो लाज प्रभु, मेरी विनती ना ठुकरा जाना,

जो रूखा सूखा घर पे बना, कभी उसका भोग लगा जाना,

मेरे घर के दीये में तेल नहीं, तेरी ज्योत जगाऊं मैं कैसे,

मेरा खुद ही बिछौना धरती पर, दरबार सजाऊं मैं कैसे,

जहाँ मैं बैठा वहीं बैठ के तुम, निर्धन की खीचड़ खा जाना,

जो रूखा सूखा घर पे बना, कभी उसका भोग लगा जाना,

ना घर पे मेवा मिश्री है, ना छप्पन भोग तुम्हारे लिए,

सिर पर है कर्जा लोगों का, कई महीने हुए उधार लिए,

मैं नहीं सुदामा ना ही विदुर, निज दास समझ कर आ जाना,

जो रूखा सूखा घर पे बना, कभी उसका भोग लगा जाना,

तुम भाग्य बनाने वाले हो, प्रभु मैं तकदीर का मारा हूँ,

हे लखदातार संभालो मुझे, मैं भी किसी आँख का तारा हूँ,

मैं दोषी तुम हो क्षमानिधि, मेरे दोषों को बिसरा जाना,

जो रूखा सूखा घर पे बना, कभी उसका भोग लगा जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।