आसरो दादी थारो है आसरो म्हणे थारो है

पारंपरिक
श्री राम भजन रानी सती दादी भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

थारे भोरसे बेठियो मैया कोई न भारो है,

आसरो दादी थारो है आसरो म्हणे थारो है,

नैया मेरी भटक गई है,

थोड़ी थोड़ी चटक गई है,

मझधारा में अटक गई है,

दाराम दार भवानी अब तो,

था पर सारो है,

आसरो दादी थारो है आसरो म्हणे थारो है,

हाथ पकड़ ले दुभ ना जाऊ,

रो रो थाने आज भुलाऊ,

मेरे मन की पीड़ सुनाऊ,

थे ना सुनो तो दुभ ही जा तू,

होर न चारो है,

आसरो दादी थारो है आसरो म्हणे थारो है,

हरष भवानी लाज बचा ले चरना माहि लाज बिठा ले,

टाबरियां ने गले लगा ले जग से थारी हाथ थाम ले तेरे सहरो है,

आसरो दादी थारो है आसरो म्हणे थारो है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।