बाँस की बाँसुरिया पे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बाँस की बाँसुरिया पे घणो इतरावे,

कोई सोना की जो होती, हीरा मोत्यां की जो होती,

जाणे कांई करतो, कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

जेल में जनम लेके घणो इतरावे,

कोई महलां में जो होतो, कोई अंगना में जो होतो,

जाणे कांई करतो कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

देवकी रे जन्म लेके घणो इतरावे,

कोई यशोदा के जो होतो, मां यशोदा के जो होतो,

जाणे कांई करतो कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

गाय को ग्वालो होके घणो इतरावे,

कोई गुरूकुल में जो होतो, कोई विद्यालय में जो होतो,

जाणे कांई करतो कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे....

गुजरया की छोरियां पे घणो इतरावे,

ब्राह्मण बनिया की जो होती, सेठ ठाकुरां की जो होती,

जाणे कांई करतो कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

सांवली सुरतिया पे घणो इतरावे,

कोई गोरो सो जो होतो, कोई सोणो सो जो होतो,

जाणे कांई करतो कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

माखन और मिश्री पे घणो इतरावे,

छप्पन भोग जो होतो, काजू मेवा जो होतो,

जाणे कांई करतो... कांई करतो,

बाँस की बाँसुरिया पे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।