साईयां वे साईयां

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॥ पावन पाठ ॥

साईयां वे साईयां साईयां वे साईयां

मैं तेरे उते आसा वे लाइयाँ,

मेरे दिल दे राजा दुरो मैं चल के आइयाँ,

साईयां वे साईयां....

तेरे नाम दी माला गल विच पाई है,

तेरी तस्वीर मैं ते दिल च वसाई है,

आजा वे साईं देर न लाई,

मेरे दिल दे राजा दुरो मैं चल के आइयाँ,

साईयां वे साईयां....

तू ही मेरी ज़िन्द साईं तू ही मेरी जान है,

तू ही मेरा दीन साईं तू ही ईमान है,

आजा वे साईं देर ना लाइ,

मेरे दिल दे राजा दुरो मैं चल के आइयाँ,

साईयां वे साईयां....

तेरे मिलने दी कदी आस टूट जाये ना,

ढूंढे समुनदरा च बेड़ी दुभ जाए ना,

तू आजा में साईं देर न लाइ,

मेरे दिल दे राजा दुरो मैं चल के आइयाँ,

साईयां वे साईयां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।